Save Tigers

Save Tigers (भारत बन रहा बाघों का आश्रयस्थान )

२९ जुलाई को कल आंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस था | बाघ भारत का राष्ट्रीय प्राणी है, इसलिए इस दिन का महत्त्व और भी बढ़ जाता है | बंगाली बाघ ( पैंथेरा टायग्रीस ) यह बाघ भारत का राष्ट्रीय प्राणी है | बहुत पहले बाघ की कम होती संख्या के करण इनका अस्तित्व जल्द ही ख़तम हो जायेगा ऐसा लग रहा था | पर अब आयी रिपोर्ट की वजह से ये बात सामने आयी है की अब भारत मे कुल ३१६७ बाघ है | यह दुनिया में सबसे ज्यादा संख्या है, और ये हमारे लिए बाघों की जनजाति को बचाने की मोहिम में (Save Tigers) एक नयी कामयाबी है | इससे पहले १९ वी सदी की शुरुवात में भारत में कुल ४०,००० से ऊपर बाघ दिखाई देते थे, मगर धीरे – धीरे यह संख्या कम हो गई | १९७२ को बाघ की जनगणना की गई तो उस वक्त सिर्फ १४११ ही बाघ पाए गए | और यह एक चिंता की बात भी थी | क्यूँ की जिस तरह इनकी संख्या घट रही थी, उस हिसाब से बाघ जल्द ही यहाँ से ख़तम ही हो जायेंगे ऐसा लग रहा था | इसी जाती बचाने के लिए कुछ ठोस प्रयत्न करना (Save Tigers) आवश्यक था | इसलिए १९७३ में बाघ संवर्धन कार्यक्रम (Save Tigers)  शुरू किया | और जब २०११ को फिर वन्यजीव जनगणना हुई तो यह संख्या १७०० हुई |

पहले जब धीरे धीरे बाघों की संख्या कम हो रही थी, इस कार्यक्रम की वजह से वह बढ़ने लगी थी | और आज दुनिया में सबसे ज्यादा बाघ सिर्फ भारत में है | आज भारत में कुल ३१६७ बाघ है, और ये दुनिया के सभी बाघों की ७५% संख्या है जो सिर्फ भारत में है | मतलब अब यह देश बाघों की जनजाति के लिए सुरक्षित स्थान माना जा रहा है | फिर भी पहले जितने बाघ यहाँ थे ( लगभग १०० साल पहले ) इसके मुकाबले यहाँ की मौजुदा बाघों की संख्या सिर्फ 3-४% ही है | मलतब अब पहले के मुकाबले सिर्फ 3-४% बाघ ही हिन्दुस्थान में बाकी है |

निचे दिए गए सिर्फ १३ देशो में ही बाघ दिखाई देते है, और खास करके एशिया खंड में ही इनका वास दिखाई देता है, मतलब एशिया ही इनके लिए सुरक्षित रह गया है |

( यह संख्या उस देश के वन्यजीव जनगणना के अनुसार है )

देशबाघों की संख्या
भारत३१६७
रशिया७५०
इंडोनेशिया४००
नेपाल३५५
थाईलैंड१८९
भुतान१५१
मलेशिया१५०
बांग्लादेश१४६
म्यानमार२२
चीन२०
व्हिएतनाम
लाओस

और इनमे १३ वा देश कंबोडिया था, जिसमे मौजुदा समय में कोई भी बाघ की संख्या नहीं दिखाई दी है |

दुनिया में भारत में सबसे ज्यादा बाघ बाघ है | और भारत में मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा बाघ है | मध्यप्रदेश में कुल ५२६ बाघ है, उसके बाद कर्नाटक में ५२४, उत्तराखंड में ४४२ , महाराष्ट्र में ३१२  और तमिलनाडु में २६४ बाघ है | यह वो राज्य है जिसमे सबसे ज्यादा बाघ दिखाई देते है, इसके आलावा और भी राज्यों में बाघ पाए जाते है |

बाघ कम होने का कारण क्या है ?

  • बाघों की बढती शिकार –

बाघ संवर्धन का कानून लागु होने से पहले उनको बचाने के लिए कोई भी ठोस काम नहीं हो रहा था, इसलिए लोक अपने मलतब के लिए उन्हें मर दिया करते थे | बाघ की खाल, नाख़ून और उसका मांस की आंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत बहुत होती है, इसलिए इसे मारकर लोग इन्हें बेच देते थे |

  • जंगल की कमी –

इंसानों ने अपने विकास के लिए खड़े जंगल भी तोड़ दिए, जो की इन जंगली जानवारों का घर था | इसलिए उन्हें सुरक्षित जगह जो जंगल थी वो नहीं रही, या फिर वो कम हो गयी | इंसानों की जनसख्या हर दिन बढ़ रही है, इस कारण उनको रहने की जगह कम पड रही है, और इस कमी को पूरी करने के लिए वो जंगल में जाकर वहाँ के पेड़ काटकर, जानवरों को मारकर अपना घर बना रहा है | इससे जरुरत तो पूरी होती है, मगर जंगली जानवरों की संख्या काफी घट रही है |

  • अनुकूल वातावरण की कमी –

जंगल की कटाई के बाद भी (जंगली जानवर) बाघ जंगल में रहते है, मगर उनका खाना जो होता है, छोटे छोटे जानवर उनकी भी इस कारणों से कमी आ गयी है, इसलिए बाघ अपनी भूक नहीं मिटा सकते, और मर जाते है, यह समस्या हर जंगली जानवरों के साथ हुई है | और जंगल कम हुए, इसलिए इन जंगली जानवर इसमें अनुकूलित नहीं हो पा रहे है |

  • बुढ़ापे की वजह –

हर इक जीव को इस दिन मरना ही होता है, इसलिए बाघ भी अपनी नैसर्गिक मौत मरते है |

बाघों को कैसे बचाया जाये (Save Tigers)

  • जंगल की संख्या में वृद्धी-

बाघ एक जंगली जानवर है, इनको बचाने के लिए सबसे असरदार यही होगा की, जंगल को ना तोडा जाये, और उनकी संख्या भी बढाई जाये |

  • व्याघ्र प्रकल्प की सीमा बढाई जाये –

बाघ बचाने में व्याघ्र प्रकल्प (बाघ प्रकल्प ) का बड़ा योगदान रहा है | बाघ जंगली जानवर है, और वो जंगल में आजादी से घूम फिरना पसंद करता है, इसलिए ऐसे प्रकल्पों की संख्या और सीमा बढ़नी होगी, इससे उनको एक जगह कैद होने की भावना नहीं आएगी और वो आजादी से रहेंगे |

  • शिकार के खिलाफ –

बाघ की कमी का सीधा कारण उनकी हो रही शिकार है, जंगली जानवरों के संवर्धन का कानून तो लागु हो गया, फिर भी लोग पैसों के लिए चोरी से शिकार करते है | इसलिए उनपर भी कठोरता से करवाई की जाये |

बाघ और हर एक जंगली जानवर पर्यावरणीय घटक है, और इनका पर्यावरणीय खाद्य श्रूखला में अमुल्य महत्व है, अगर एक भी घटक छुटा तो इसका सीधा परिणाम हमारे जीवन पर होता है | इसलिए हर जानवर को बचाना महत्वपूर्ण कार्य है |

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